Sunday, 29 January 2012

ठहराव...

ठहराव,
किसी पड़ाव पर नहीं, और न किसी मंजिल पर,
ठहरना,
खुद से चलकर खुद पर...
ठहराव,
किसी दुराव से नहीं, और न किसी दुःख से,
ठहरना,
आत्म-मुग्धता से चलकर 'आत्म-बोध' पर...
ठहराव,
जैसे हिमालय, जैसे अथाह समंदर, जैसे रास्ते...
ठहरना,
और सोख लेना, सूर्य की साडी संचित ऊर्जा,
ठहरना,
और पी लेना, वायु का सारा व्याकुल वेग...
ठहरना,
और देख लेना, सारे अदृश्य, एक ही दृश्य में...
ठहरना,
और पा लेना, सारे उत्तर, निःशब्द...

2 comments:

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  2. tharna.....ek padao ki tarah.....aur fir aage badh jana kisi naye thikane ke talash me......hamesha adhure rahne wali talash....hamesha adhure se dikhne wale padao.....dikhna kya adhure hi hote hai....behad ajeeb....bht ajeeb....haad se jayda ajeeb.....................
    jo likha vo sunder.....adhbhut.....hamesha ki tarah......

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